मेसीज थैंक्सगिविंग डे परेड 2024: विशाल गुब्बारे, स्टार प्रदर्शन और अविस्मरणीय पल नव॰, 29 2024

मेसीज थैंक्सगिविंग डे परेड का जादू

न्यूयॉर्क सिटी में आयोजित मेसीज थैंक्सगिविंग डे परेड 2024 एक ऐसा आयोजन था जिसने अपनी भव्यता और धूमधाम से सभी का मन मोह लिया। इस 98वीं परेड में 17 विशाल चरित्र गुब्बारे थे, जिनमें नए आगमन के रूप में मिनी माउस और स्पाइडर-मैन जैसे पात्र शामिल थे। इसके अलावा, 22 फ्लोट्स, 15 नवीनता और विरासत इनफ्लैटबल्स, और 11 मार्चिंग बैंड्स इस आयोजन का हिस्सा बने।

प्रतिभागियों की सूची में सबसे प्रमुख नाम थे जेनिफर हडसन, काइली मिनोग, बिली पोर्टर, एरियाना मेडिक्स, बिशप ब्रिग्स, चार्ली ड'एमेलियो, क्लो बेले, कोको जोन्स, डैन+शे, दाशा, जिमी फॉलन और उनके बैंड द रूट्स और काइली केंटरेल। परेड की शुरुआत पारंपरिक रिबन-कटिंग से हुई, जिसे इस वर्ष खासतौर पर अलिसन ब्राइ द्वारा किया गया। इस आयोजन ने वेस्ट 77वीं स्ट्रीट और सेंट्रल पार्क वेस्ट से शुरू होकर मैसीज़ हेराल्ड स्क्वायर तक का सफर तय किया।

परेड की उत्सवपूर्ण होड़

इस बार का आयोजन बारिश के बावजूद एक स्माइल के साथ आगे बढ़ा, और इसने दर्शकों के उत्साह को कम नहीं होने दिया। न्यूयॉर्क के सर्द मौसम में भी प्रतिभागी ठंड में अपनी उत्साह बनाए रखने में सफल रहे। परेड का इतिहास 1924 से रहा है और गरीब हालात में अमेरिका में आकर बसने वाले मैसीज के कर्मचारियों द्वारा इसकी शुरुआत की गई थी।

1927 में पहली बार परेड में गुब्बारों को शामिल किया गया, जब फेलिक्स द कैट को पहली बार उड़ाया गया था। वर्ष दर वर्ष परेड ने अपना स्वरूप बदला, इसके आयोजन में और भी उत्कृष्टता आ गई। आज के दौर में यह परेड एक भव्य आयोजन में बदल चुकी है जिसमें दुनियाभर के लोग हिस्सा लेते हैं।

उत्सव के प्रतीक के रूप में परेड का महत्व

थैंक्सगिविंग डे परेड अपने आप में केवल एक परेड नहीं है, यह एक उत्सव है जो अमरीकी समाज के अनेक पहलुओं को दर्शाता है। यह आयोजन उन सभी का धन्यवाद करता है जो राष्ट्र की प्रगति में सहभागी बने हैं। मेसीज का यह आयोजन हर साल करोड़ों लोगों के दिल की गहराइयों में उतरता है और यह एक मंच प्रदान करता है जहाँ विविध सांस्कृतिक पहलुओं के माध्यम से एकता को दर्शाया जाता है।

आकर्षण के केंद्र में विशाल गुब्बारे

हर साल की तरह इस बार भी विशाल गुब्बारे परेड के आकर्षण का केंद्र बने रहे। इन्हें हवा में उड़ते देखना किसी के लिए भी एक अद्भुत अनुभव हो सकता है। इस परेड में भाग लेने वाले अलग-अलग पृष्ठभूमि के व्यक्तियों के लिए यह एक ऐसा आयोजन होता है जो सौहार्द और साझेपन का प्रतीक है।

परेड का यह सबसे विशाल आयोजन ना केवल मनोरंजन प्रदान करता है बल्कि यह सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण का एक प्रमुख साधन भी है। इस दौरान आने वाले अलग-अलग प्रकार के फ्लोट्स और गुब्बारे इस बात का प्रतीक है कि एक अद्भुत अनुभव पाने के लिए किस प्रकार अलग-अलग तत्व एक साथ आ सकते हैं।

16 टिप्पणि

  • Image placeholder

    DIVYA JAGADISH

    दिसंबर 1, 2024 AT 16:02
    मेसीज परेड हमेशा की तरह धमाकेदार रही। गुब्बारे देखकर बचपन याद आ गया।
  • Image placeholder

    Amal Kiran

    दिसंबर 3, 2024 AT 01:00
    ये सब बकवास है। भारत में भीख मांग रहे हैं और अमेरिका के बच्चों के लिए गुब्बारे उड़ा रहे हैं।
  • Image placeholder

    abhinav anand

    दिसंबर 4, 2024 AT 18:05
    मैंने कभी नहीं देखा था लेकिन इसकी तस्वीरें देखकर लगा जैसे कोई जादू हो रहा है। बहुत सुंदर लगा।
  • Image placeholder

    Rinku Kumar

    दिसंबर 6, 2024 AT 13:50
    अच्छा जी, बहुत बड़ी उपलब्धि है। जब एक कंपनी अपने कर्मचारियों के लिए इतना बड़ा उत्सव बना रही है, तो दुनिया भर में लोगों को इसकी तारीफ करनी चाहिए। बहुत बढ़िया।
  • Image placeholder

    Nikita Patel

    दिसंबर 7, 2024 AT 15:57
    ये परेड सिर्फ गुब्बारे और फ्लोट्स की बात नहीं है। ये एक ऐसी परंपरा है जो लोगों को एक साथ लाती है। अलग-अलग धर्म, भाषा, रंग के लोग एक साथ खुश हो रहे हैं। ये दुनिया के लिए एक अच्छा संदेश है।
  • Image placeholder

    abhishek arora

    दिसंबर 7, 2024 AT 16:52
    अमेरिका का ये उत्सव तो बहुत बढ़िया है 😍 लेकिन हमारे देश में भी क्यों नहीं? हम भी तो अपने त्योहारों को इतना बड़ा बना सकते हैं! 🇮🇳🔥
  • Image placeholder

    Kamal Kaur

    दिसंबर 8, 2024 AT 16:08
    मैंने इसे ऑनलाइन देखा। बिली पोर्टर तो बिल्कुल जानवर था 😂 और गुब्बारे इतने बड़े कि लगा जैसे आकाश से उतर आए हों। बहुत मजा आया।
  • Image placeholder

    Ajay Rock

    दिसंबर 10, 2024 AT 09:41
    ये सब बहुत खूबसूरत है... लेकिन क्या आपने सुना है कि इन गुब्बारों के लिए ही 5000 गैलन हीलियम खर्च होता है? और फिर भी लोग कहते हैं जलवायु परिवर्तन खतरनाक है? 🤔
  • Image placeholder

    Lakshmi Rajeswari

    दिसंबर 11, 2024 AT 13:41
    ये सब बस एक धोखा है!! गुब्बारे उड़ाकर जलवायु बर्बाद कर रहे हैं, और लोग खुश हैं? क्या आप जानते हैं कि ये गुब्बारे बाद में समुद्र में जाकर मछलियों को घुटने तक घेर लेते हैं?? ये अमेरिका का नया अपराध है!!!
  • Image placeholder

    Piyush Kumar

    दिसंबर 11, 2024 AT 20:37
    इस परेड का असली मतलब ये है कि जब तक लोग खुश रहेंगे, तब तक दुनिया बर्बाद नहीं होगी। ये एक छोटा सा उत्सव है, लेकिन इसमें बड़ा संदेश छिपा है। हमें भी ऐसे उत्सव बनाने चाहिए।
  • Image placeholder

    Srinivas Goteti

    दिसंबर 12, 2024 AT 02:20
    परेड का इतिहास देखकर लगता है कि इसकी शुरुआत एक साधारण विचार से हुई थी। अब ये एक बड़ा उद्योग बन गया है। इसकी सरलता और भावना अभी भी बरकरार है।
  • Image placeholder

    Rin In

    दिसंबर 12, 2024 AT 04:50
    मिनी माउस और स्पाइडर-मैन देखकर तो मैं भी बच्चा हो गया 😆 और बारिश में भी लोग नाच रहे थे! ये ही असली जिंदगी है भाईयों! 🙌
  • Image placeholder

    michel john

    दिसंबर 13, 2024 AT 23:51
    ये परेड तो बहुत अच्छी लगी... लेकिन अगर ये सब भारत में होता तो क्या होता? नहीं होता! क्योंकि हमारे यहाँ लोगों को नहीं पता कि खुश रहना क्या है!! 😒
  • Image placeholder

    shagunthala ravi

    दिसंबर 15, 2024 AT 03:40
    हर साल ये परेड एक नया संदेश देती है। आज का संदेश ये है कि जब हम एक दूसरे के साथ खुश रहते हैं, तो दुनिया भी थोड़ी बेहतर हो जाती है। बहुत खूबसूरत बात है।
  • Image placeholder

    Urvashi Dutta

    दिसंबर 16, 2024 AT 10:59
    इस परेड का इतिहास बहुत दिलचस्प है। शुरुआत 1924 में हुई थी, जब मैसीज के कर्मचारी नए आए हुए विदेशी श्रमिकों के साथ अपनी संस्कृति का जश्न मनाना चाहते थे। आज ये परेड एक वैश्विक घटना बन गई है, जहाँ एशिया, अफ्रीका, लैटिन अमेरिका के संगीत, नृत्य और कला के तत्व शामिल हो रहे हैं। ये सिर्फ एक परेड नहीं, ये एक सांस्कृतिक आयोजन है जो लोगों को एक दूसरे के बारे में सीखने का मौका देता है। ये गुब्बारे तो बस बाहरी शक्ल है, असली जादू तो उन लोगों की खुशी में है जो इसे बनाते हैं।
  • Image placeholder

    Rahul Alandkar

    दिसंबर 18, 2024 AT 04:23
    मैं इस बार नहीं देख पाया। लेकिन जब भी देखता हूँ, लगता है जैसे दुनिया थोड़ी खुश हो गई है।

एक टिप्पणी लिखें